खूबसूरत और रहस्यमयी वसुंधरा फॉल्स

भारत के उत्तराखंड में वसुंधरा झरना जितना खूबसूरत है उतना ही रहस्यमय भी है, मनुष्य को छूता तक नहीं है। प्राकृतिक का वह रूप जिसके आगे विज्ञान भी बौना और मजबूर नजर आता है।

भारत एक धार्मिक देश है, जहाँ प्रकृति और परम्पराओं का संगम देखने को मिलती है। प्राकृतिक अनेक अदभुत रूप सहेजे बैठी है, जहाँ खूबसूरती और रहस्यमय के संगम हमें आश्चर्य चकित करती रहती है। भारत के देवभूमि उत्तराखंड में कदम-कदम पर प्राकृतिक की ख़ूबसूरती देखने को मिलती हैं और बहुत से धार्मिक स्थल भी है। उत्तराखंड अपनी आगोश में अनेक प्रकार में रहस्य छुपाये हुए है। बद्रीनाथ से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर ऐसा ही एक जगह वसुंधरा झरना है।

इस अद्भुत और चमत्कारी झरना को देखते ही पर्यटक अपनी थकान भूल जाते हैं। ऐसा लगगता है जैसे पृथ्वी पर नहीं स्वर्ग में हैं। वसुधारा झरना 400 फीट ऊंचाई से गिरता है। यह झरना हमारे देश में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। जो भी श्रद्धालु बद्रीनाथ जाते हैं वो इस झरने को ज़रूर देखने जाते हैं, क्योंकि हिन्दू धर्म में इसका एक अलग ही महत्व है। हिन्दू धर्म के ग्रंथों के अनुसार इस जगह पर पांच पांडवों में से सहदेव ने अपने प्राण त्यागे थे। वसुंधरा झरने का पानी पापी व्यक्ति को अपने पास आने नहीं देता है, यह केवल पवित्र लोगों को ही छूता है।

यह सच मे अकाल्पनिक लगता है पर यह बिलकुल सच है। वसुंधरा झरने का इस रहस्य के विज्ञान आज तक नहीं समझ पाया है। वसुंधरा झरने का पानी अनेक प्रकार के जड़ी-बूटियों वाले पेड़-पौधों को छूकर नीचे आता है, इसीलिए तो जो भी इसका सेवन करता है किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं लगती।

वसुंधरा झरना तक पहुँचने के लिए माणा गां गाँव से ट्रैकिंग की शुरुआत करनी होगी, और फिर झाड़ियों से होते हुए झरने तक पहुंचना होगा। लेकिन अगर आपको अपनी यात्रा को रोमांचक बनानी है, तो अलकनंदा नदी से होते प्रकति की अनदेखी खूबसूरती की झलक देखते हूए भी इस झरने तक पहुंचे सकते हैं।

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