कुलधरा गाँव का खौफनाक इतिहास – हजारों आत्माओं का वाल श्रापित गाँव

कई दशक बित गए यहाँ कोई नहीं रहता है। इस गाँव के मंदिर में भगवान भी नहीं है। कहते हैं इस गाँव में एक नहीं हजारों आत्माओं का निवास है। आज से लगभग 200 साल पहले रातों-रातों हजारों लोग गायब हो गये। गाँव के लोग कहाँ गये यह आज भी एक रहस्य है। इस गाँव में स्थानीय लोग भी आने से डरते हैं।

भारत के एक ऐसा गाँव है, जो कई रहस्यमयी घटनाओं को समेटे हुए है। यह राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा गाँव कि कहानी है। बात 19वीं शताब्दी की है। यहाँ समृद्ध पालीवाल ब्रह्मामण समुदाय के लोग रहा करते थे। जैसलमेर के तत्कालीन दीवान सलीम सिंह बहुत ही क्रूर था। सलीम सिंह की नजर कुलधरा के ही एक पुजारी की बेटी को देखा। तब सलीम सिंह उसे पाने के लिए बेचैन था। एक दिन सलीम सिंह कुलधरा गाँव आया उसने गांव वालों से कहा कि पुजारी की बेटी से उसकी शादी करा दें। गांव वालों ने ऐसा करने से मना कर दिया तब सलीम सिंह ने उन्होंने धमकी दी की वो गांव पर आक्रमण करके उसे तहस-नहस कर देगा।

धमकी के बाद पालीवाल ब्राह्मणों ने अपने लड़की के सम्मान की रक्षा के लिए फैसला किया गांव छोड़ा था और रातों-रात गांव खाली करके चले गए। लोककथा के अनुसार पालीवाल ब्राह्मणों ने जाते-जाते इस जगह को श्राप दे गए थे, कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से वीरान पड़ा हैं। गाँव के लोग कहां गए, कैसे गए, यह आज तक एक रहस्य है। उस समय के मूल निवासी ऐसा मान लेते हैं कि यहाँ भूत रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं हैं। किसी को पता नहीं भूतों के बारे में यह सब कहानियाँ किसने सुनाई है।

कुलधरा पिछले कई दशक से एक पुरातात्विक स्थल है और यहाँ दिन के समय में काफी पर्यटक आते हैं। जो भी पर्यटक यहां आते हैं उन्हें यहाँ कुछ अजीबोगरीब अहसास होता है। रात में यहाँ पर्यटकों को रुकने की इजाजत नहीं हैं। कुलधरा में 970 मकान हैं, जो खंडहरों में तब्दील हो चुके हैं, और उस दौर के आलीशान मकानों की गवाही दे रहा है। पालीवाल ब्राह्मणों को वास्तुशास्त्र, वेद और शास्त्रों का भरपूर ज्ञान था। यहाँ के मकान वैज्ञानिक तरीकों से बसाए गये थे। गर्मी में भी, इनके घर ठन्डे ही रहते थे। ये ऐतिहासिक तौर पर सच है कि कुलधरापालीवाल ब्राह्मण बेहद अमीर और सशक्त थे।