राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ – RSS

आइये जानते हैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुडी कुछ दिलचस्प बातें — राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के साथ-साथ मजबूत, शक्तिशाली और विकसित राष्ट्र बनने पर हमेशा जोर दिया है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत का एक हिन्दू राष्ट्रवादी स्वयंसेवक संगठन हैं। यह संगठन दुनिया के सबसे बड़ा संगठन है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना 27 सितम्बर 1925 विजयादशमी के दिन हुआ था। इस संगठन की स्थापना डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। 2025 में ये संगठन 100 साल का हो जाएगा। संघ के स्थापना की योजना हेडगेवार ने अपने घर पर 17 लोगों के साथ मिलकर की थी। इस बैठक में हेडगेवार के साथ विश्वनाथ केलकर, भाऊजी कावरे, अण्णा साहने, बालाजी हुद्दार, बापूराव भेदी आदि मौजूद थे।

शुरुआती दौर में हिंदुओं को सिर्फ संगठित करने का विचार से बनाया गया था। इस संघ का नामकरण 17 अप्रैल 1926 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रूप में हुआ था। भारत में करीब 80 हजार स्थानों पर संघ की शाखा है। दुनिया के करीब 40 देशों में संघ सक्रिय है। मौजूदा समय में संघ की दैनिक शाखाएं 56 हजार 569, 13 हजार 847 साप्ताहिक मंडली और 9 हजार मासिक शाखाएं हैं। एक अनुमान के अनुसार 50 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक प्रति शाखाओं में आते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय नागपुर में हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख

डॉक्टर केशवराव बलिराम हेडगेवार उपाख्य डॉक्टरजी (1925 – 1960)
माधव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य गुरूजी (1980 – 1973)
मधुकर दत्तात्रय देवरस उपाख्य बालासाहेब देवरस (1973 – 1993)
प्रोफ़ेसर राजेंद्र सिंह उपाख्य रज्जू भैया (2000 – 2009)
कृपाहल्ली सीतारमैया सुदर्शन उपाख्य सुदर्शनजी (२००० – २००९)
डॉ॰ मोहनराव मधुकरराव भागवत (2009 – अभी तक)

संघ पर अनेक आलोचनाएँ और आरोप लगते रहें हैं। संघ का राजनीति से सीधा सम्बंध नहीं है, लेकिन देश की सत्ता बनाने और बिगाड़ने की ताकत संघ रखता है। संघ पर तीन बार प्रतिबंध लगा था। महात्मा गांधी की हत्या को संघ से जोड़कर देखा गया, क्योंकि नाथूराम गोडसे संघ के स्वयंसेवक थे। इसलिए गांधी की हत्या का आरोप संघ पर लग और संघ को प्रतिबंध कर दिया गया। जाँच समिति की रिपोर्ट ने संघ आरोपी नहीं माना और फिर प्रतिबंध समाप्त कर दिया गया।

दूसरी बार आपातकाल के दौरान 1975 से 1977 तक संघ पर प्रतिबंध लगी रही। तीसरी बार जब 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद गिराया गया था, तब छह महीने के लिए प्रतिबंध लगाया गया था।अनेक आलोचनाएँ और आरोप के बावजूद आज दुनिया के सबसे बड़ा संगठन के रूप में को स्थापित कर चुका है।

भारतीय जनता पार्टी, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय किसान संघ, भारतीय मजदूर संघ, सेवा भारती, राष्ट्र सेविका समिति, शिक्षा भारती, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती, संस्कार भारती, वनवासी कल्याण आश्रम, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, लघु उद्योग भारती, विश्व संवाद केंद्र आदि संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़े हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी का पैतृक संगठन माना जाता है, क्योंकि संघ से निकले नेताओं ने ही भारतीय जनता पार्टी की स्थापना किया था।

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे’ की प्रार्थना के साथ कई दशकों से लगातार संघ की शाखायें लग रही हैं। इसक संगठन का आधार समृद्ध और प्राचीन भारतीय मूल्यों को बनाए रखना है। हिंदू समुदाय को एकजुट और मजबूत करने के साथ-साथ हिंदुत्व की विचारधारा का प्रचार करना भी है।

संघ साफ तौर पर हिंदू समाज को उसके धर्म और संस्कृति के आधार को शक्तिशाली बनाने की बात करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने के साथ-साथ मजबूत, शक्तिशाली और विकसित राष्ट्र बनने पर हमेशा जोर दिया है। इसलिए संघ का विरोध हमेश भारत के प्रमुख राजनीतिक दल और अलग-अलग विचारधार के संगठन विरोध करती रहती है। ये संगठन विदेशी फंड की सहायता से संघ ही नहीं भारत के विरुध दुष्प्रचार करती रहती है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमेशा राष्ट्र को अपना सेवा प्रदान करती रही है। संघ भरत के अलावा विदेशों में भी सहायता सेवा प्रदान करती रही है। सामाजिक सेवा, सामाजिक सुधार, राहत और पुनर्वास जैसे कार्य भारतीय समाज के लिए करती रहती है। हिन्दू धर्म में सामाजिक समानता के पक्ष लिया और सामाजिक वर्गीकरण को दुर करने में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

शिविर की यात्रा के दौरान छुआछूत को खत्म करने पर जोड़ दिया। प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1962 के भारत-चीन युद्ध में भारतीय सेना के लिए रक्त दान और राहत सामाग्री पहुंचाने का काम किया था। स्वयंसेवकों ने पुर्तगालियों से 21 जुलाई 1954 को दादरा, 28 जुलाई 1954 को नरोली और फिपारिया, और फिर 2 अगस्त 1954 कब्जे से मुक्त करा कर भारत सरकार को सौंप दिया।

स्वयंसेवक ने 1955 से गोवा मुक्ति संग्राम में शामिल होकर अंततः 1961 में गोवा स्वतन्त्र हुआ। 1965 के पाकिस्तान से युद्ध के समय लालबहादुर शास्त्री जी ने भी संघ को दिल्ली में यातायात नियंत्रण का जिम्मा सौंपा। स्वयंसेवक ने 22 दिनों तक दिल्ली में यातायात नियंत्रण का काम किया। भारतीयों लोकतांत्रिक के अधिकारों की रक्षा के लिए आपातकाल के विरुद्ध आन्दोलन में बड़ी भूमिका निभाई। सर्वोदयी नेता जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में समग्र क्रांति आंदोलन का समर्थन किया। इस आंदोलन में भाग लेकर डेढ़ लाख स्वयंसेवकों जेल गये थे। संघ ने अपने सहयोगी जनसंघ और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद साथ मिलकर तानाशाही इंदिरा गांधी के विरुध आंदोलन को और तेज कर दिया।

आंदोलन को तेज होता देख इंदिरा गांधी ने राजनीतिक सौदेबाजी करने की कोशिश किया। लेकिन संघ ने आंदोलन से समर्थन वापस लेने से मना कर दिया। संघ ने कहा हमारे लिए देश पहले है, संगठन बाद में हम देश की जनता के साथ विश्वासघात नहीं कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्थापना से लेकर आज तक भारत के विरुध कोई भी काम न किया है और न ही अपना सर्मथन दिया है। फिर भी भारत के राजनीतिक दल अपने राजनीति स्वार्थ के लिये हमेशा विरोध करती रहती है।

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